गेंग्रिन की बीमारी के कारण लक्ष्ण आयुर्वेदिक व घरेलू इलाज

गेंग्रिन की बीमारी gangrene
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गेंग्रिन की बीमारी के कारण लक्ष्ण आयुर्वेदिक व घरेलू इलाज

गेंग्रिन की बीमारी क्या है ? What is gangrene                                                                                                                           यह एक बहुत ही भयंकर बीमारी है ! मित्रो कई बार छोटी मोटी चोट भी भयंकर रूप धारण कर लेती है, यदि शुगर के मरीज को लग जाए ! उसका जीना दुष्वार हो जाता है, क्योंकि यह चोट कभी भी जल्दी से ठीक नही होती ! कई बार तो डॉक्टर भी उस चोट को ठीक नही कर पाते, और यह चोट धीरे – धीरे गेंग्रिन की बीमारी (शरीर के अंग का सड जाना )में बदलने लगती है ! फिर शरीर के उस अंग को काट कर बाहर निकलना पड़ता है !

दोस्तों एलोपेथी में एक भी दवा एैसी नही है, जो इस बीमारी को 1% भी ठीक कर पाए ! जैसे ही किसी एैसे मरीज को आप डॉक्टर के पास लेकर जाते है, तो डॉक्टर तुरंत बोल देता है कि गेंग्रिन की बीमारी का कोई इलाज नही ! हम सिर्फ इसको काट कर शरीर से निकल सकते है ! जब ओप्रेसन हो जाता है, तब भी एलोपेथीक डॉक्टर इसकी कोई गारंटी नही देता ! कि यह सम्पूर्ण रूप से ठीक होगा या नही ? क्योंकि ओप्रेसन होने के बाद भी इसके दोबारा होने के चांस बहुत होते हैं ! और एैसे कई केस देखे भी गये हैं ! मित्रो इस गेंग्रिन की बीमारी से कई बार मरीज की म्रत्यु भी हो जाती है !

गेंग्रिन कितने प्रकार का होता है | How many type of gangrene

गेंग्रिन की बीमारी के तिन रूप होते हैं जो इस प्रकार से हैं :-

1 सुखा गेंग्रिन

2 नम गेंग्रिन

3 गैस गेंग्रिन

इसे भी पढ़े :- गौमूत्र के चमत्कारी फायदे यह कैंसर जैसी बीमारी को जड से खत्म कर देता है ! अभी जाने कैसे 

गेंग्रिन की बीमारी के लक्ष्ण | Symptoms of gangrene

गेंग्रिन की बीमारी सबसे ज्यादा शुगर के मरीजों में ही होती है ! इसके अलावा यह अन्य को भी हो सकती है !

1 इसका सबसे पहला लक्ष्ण है, गेंग्रिन शरीर के जिस भी अंग या हिस्से में होती है वहाँ का रंग शरीर के रंग से काला नजर आता है !

2 शरीर के जिस भी अंग पर गेंग्रिन होती है, वह अंग सूज जाता है या फूल जाता है !

3 जिस भी अंग या हिस्से में गेंग्रिन की बीमारी हो जाती, वह अंग सड़ जाता है और उससे बदबू आने लगती है !

4 गेंग्रिन कि वजह से त्वचा कि पपड़ी उतरने लगती हैं ! और त्वचा बहुत ज्यादा सुख जाती है, या खुदरी हो जाती है !

5 गेंग्रिन की बीमारी के कारण शरीर के उस अंग से काला या भूरा रंग का मवाद या रेसा बाहर निकलने लगता है ! ये सारे लक्ष्ण देख कर हम गेंग्रिन की बीमारी का अंदाजा लगा सकते   हैं !

6 जिस भी अंग में गेंग्रिन हो जाती है वो अंग कुछ भी महसुस करने कि अक्षमता खो देता है !

गेंग्रिन होने के कारण | Reasons of gangrene

गेंग्रिन की बीमारी का सबसे मुख्य कारण है शरीर के किसी भी अंग, हिस्से, उत्क तक खून का प्रवाह रुक जाना ! क्योंकि यह ठीक वैसे ही काम करता है, जैसे हम किसी पौधे को अगर पानी देना बन्द कर देते हैं, तो वह सूखने लगता है ! ऐसा ही हमारे शरीर के अंगो के लिए खून बहुत जरूरी है ! जब खून का प्रवाह रुक जाता है तो वह अंग सूखने लग जाता है और उस अंग के उत्क या टिसु नष्ट होने लगते हैं !

गेंग्रिन किन किन को हो सकता है | Witch gengrene can have

1 गेंग्रिन की बीमारी सबसे ज्यादा शुगर के मरीज को होती है !

2 शरीर के बहुत ज्यादा जल जाने से भी गेंग्रिन हो जाता है !

3 किसी भी तरह के ओपरेशन में इन्फेक्शन के कारण !

4 नशीले पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करने वाले को भी हो जाता है !

5 रोग प्रतिरोधक अक्षमता कम करने वाले रोगों से जैस कि कैंसर या एचआईवी पीड़ित को भी यह गेंग्रिन की बीमारी हो सकती है !

गेंग्रिन की बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज | Ayurvedic treatment of gangrene

मित्रो आयुर्वेद में एैसी औषधि उपलब्द हैं, जिससे गेंग्रिन की बीमारी और ओस्टोम्लैसिस ( OSTEOMYELITIS ) यानी “अस्थिमज्जा का प्रदाह” को ठीक किया जा सकता है ! इस रोग में भी म्रत कोशिकाएं पुनर्जीवित नही होती और एैसे ही गेंग्रिन की बीमारी में अंग सड जाते  हैं ! और नई कोशिकाएं भी विकशित नही होती, और न ही मांस व हड्डी इसमें दोबारा से विकशित होते ! सब पुरानी कोशिकाएं भी मर जाती हैं ! तो दोस्तों इस गंभीर बीमारी के लिए हम घर पर ही औषधि बना सकते हैं !

गेंग्रिन की बीमारी के लिए औषधि बनाने का तरीका | How to make medicine for gangrene

गेंग्रिन की बीमारी के लिए औषधि को बनाने के लिए हमे

1.भारतीय देशी गाय का मूत्र,

2.शुद्ध हल्दी और

3.गैंदे (MARIGOLD FLOWER) का फुल

इन सब सामग्री की जरूरत पडती है ! इसको बनाने की विधि भी बड़ी आसान है ! सबसे पहले गौ मूत्र को सूती कपड़े की आठ परत बनाकर छान लीजिये ! इसके बाद गैंदे के फुल की पीली या नारंगी पंखुडियां निकाल लीजिये अब इन तीनों को मिलाकर चटनी बना लीजिये ! घाव के अनुसार सामग्री लेनी है, यानी हमे यह देखना है कि घाव कितना बढ़ा है ! अगर घाव छोटा है तो गैंदे के दो या तीन फुल, और यदि घाव बड़ा है तो चार या पांच फुल लेने है ! तो एैसे ही एरिये के हिसाब से फुल लेने हैं !

अगर चोट बाहर खुली हुई है, और खून निकल चूका है ! एलोपेथीक डॉक्टर से भी दवाई खा चूका है, लेकिन आराम नही आ रहा ! और शुगर का मरीज हैं, या कोई जेनेटिक करण भी हो सकता है, जिससे घाव ठीक नही होते ! इस पर हमे अपनी बनाई हुई औषधि लगनी है, जो हमने गौमूत्र, हल्दी और गैंदे (MARIGOLD FLOWER) के फुल से बनाई है !

गेंग्रिन पर औषधि लगाने की विधि | How can apply gangren medicine  

इसको औषधि को लगाना भी बढ़ा आसान है ! सबसे पहले घाव को गौ मूत्र से साफ करें, ध्यान रखें कि घाव को किसी भी अन्य लिकविड यानी डेटोल और सवलोन आदि से साफ नही करना ! इसको साफ करने के बाद चटनी रूप औषधि जख्म पर लगाकर, इसको रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि इसका असर शरीर की उस जगह पर बना रहे !

गेंग्रिन की बीमारी में औषधि को लगाने का समय | How meny time apply medicine on gangren

सुबह – श्याम दोनों टाईम लगाना है, पर एक बात ध्यान रखनी है कि जब भी हमे औषधि की जरूरत पडती है ! तो हमेशा नई बनानी है ! पुरानी औषधि प्रयोग नही करनी, नही तो परिणाम नही मिलेगा ! यह औषधि इतनी प्रभावशाली है कि आप सोच भी नही सकते ! केवल कुछ ही दिनों में आपको गेंग्रिन की बीमारी पर चमत्कारी परिणाम मिलेंगे ! बस एक ही ध्यान रखना है कि औषधि हमेशा ताजा ही प्रयोग करना है ! जख्म चाहे जैसा भी हो और ठीक नही हो रहा हो, इसको लगाइए ठीक हो जाएगा ! सोरायसिस (PSORIASIS) जोकि ठीक कर पाना असम्भव है ! गिला भी है, खून भी निकल रहा है, और पस भी है ! उस पर इस औषधि को लगा दीजिये सोरायसिस जड़ से खत्म हो जाएगा और दुबारा कभी नही होगा !

गेंग्रिन की बीमारी पर राजीव दीक्षित जी के विचार | Rajiv Dixit on gangrene Disease

राजीव दीक्षित जी कहते हैं कि गैंदे का फुल दुनिया की सर्वोतम औषधि है ! जब कारगिल युध्द हुआ यो इसमें काफी सैनिक घायल हुए, उनमे से कुछ को गोली लग गयी ! कुछ को बम के छर्रे लग गये ! उन सब सैनिकों को इस दवाई से ही ठीक किया गया था ! आप किसी भी मिलट्री होस्पिटल में जाएँ, तो वहाँ आप देखेंगे कि जिन सैनिकों को गोली लगती है, या किसी भी तरह का घाव होता है ! बम लगता है, उन सभी को गैंदे के फुल का रस ही औषधि के रूप में दिया जाता है ! जिससे उनके घाव बहुत जल्दी भर जाते हैं ! दोस्तों इस गैंदे के पौधे को हमेशा अपने घर पर लगाकर रखिये !

क्योंकि कैसी भी चोट हो इसके फुल की चटनी बनाकर लगा दीजिये, इससे बहुत जल्दी ठीक हो जाता है ! यह सबसे अच्छा (ANTISEPTIC) एंटिक सेप्टिक है ! पूरी दुनिया में इससे अच्छा एंटिक सेप्टिक दूसरा नही ! अगर हम मरीज को गैंदे के फुल का रस पिलादें, तो इससे गेंग्रिन की बीमारी, और चोट या घाव बहुत जल्दी ठीक होगा ! यदि इस औषधि की ताकत को और बढ़ाना है ! इसमें कोरपट  (ALOE VERA) का रस मिला लीजिये ! ये एैसा होगा मानो सोने पर शुहागा ! यह बहुत ही अद्भुत संगम है !  “कोम्बीनेशन” (COMBINATION) गैंदे के फुल का रस और कोरपट  (ALOE VERA) का रस ही है, जो खराब से खराब चोट यानि गेंग्रिन की बीमारी व घाव इन सब को एक दम ठीक कर देगा ! राजीव दीक्षित जी ने स्वयं भी इसका प्रयोग मरीजों पर किया  है ! उन्होंने इस औषधि से कई कोडियों तक को भी ठीक किया है !

गेंग्रिन की बीमारी से बचाव कैसे करें | How to prevent gangren disease

मित्रो आपने एक अंग्रेजी कहावत तो खूब सुनी होगी “Prevention is better then cure” इसलिए इसका पालन करते हुए, हम इस बीमारी से बच सकते हैं ! हमे जरूरत है कुछ बातों के ध्यान रखने की ! चलिए उनको जान लेते हैं

1 सबसे पहले हमे जो ध्यान रखना है वो है, शुगर लेवल ! क्योंकि यह खून कि सबसे खतरनाक बीमारी है, यदि दुसरे शब्दों में कहें तो यह बिमारियों का घर है ! इस लिए इससे बचकर रहें !

2 नशीली वस्तुओं का सेवन बिलकुल भी ना करें ! क्योंकि यह भी रक्त प्रवाह को बाधित करता है !

3 शरीर में वजन और फैट यानि चर्बी का ध्यान रखें ! क्योंकि बहुत ज्यादा वजन का बढना और बहुत ज्यादा वजन का घटना भी गेंग्रिन की बीमारी का कारण बन सकता है ! इस लिए वजन को संतुलित रखें !

इस प्रकार अपना ध्यान रख कर हम गेंग्रिन से बच सकते हैं !

For more information in english

अधिक जानकारी के लिए राजीव दीक्षित जी का यह वीडियो जरुर देखें  >>

दोस्तों आशा है कि आप सब को यह गेंग्रिन की जानकारी अच्छी और उपयोगी लगी होगी ! इससे आप किसी गरीब की जान और उसका पैसा दोनों बचा सकते हो ! पूरा पोस्ट पढने के लिए धन्यवाद !

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