प्लास्टिक सर्जरी का आविष्कार किसने और कहां किया ?

प्लास्टिक सर्जरी
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प्लास्टिक सर्जरी का आविष्कार किसने और कहां किया ?

प्लास्टिक सर्जरी जैसा का इसके नाम से ही ज्ञात होता है ! कि शरीर के किसी भी खराब हिस्से को पहले जैसा या उससे भी अच्छा और सुन्दर बनाना ! इस चिकित्सा में एक अज्ञात भ्रम है, कि इसमें प्लास्टिक का या इससे बने किसी चीज का इस्तेमाल होता है ! लेकिन एैसा कुछ नही होता यानि इस चिकित्सा में प्लास्टिक का कोई प्रोयग नही होता है ! यह केवल नाम है इसमें पहले वाला शब्द प्लास्टिक ग्रीक भाषा के शब्द “ प्लास्टिको” से लिए गया है ! जिसका अर्थ बनाना या तैयार करना होता है ! तो इस तरह यह नाम आया ! लेकिन प्लास्टिक सर्जरी में डॉक्टर कोई भी हिस्सा बाहर से लेकर नही आते ! इस तरह की चिकित्सा में मरीज के शरीर से ही, उत्तक लेकर दूसरी जगह पर प्र्त्यरोपित किया जाता है !

प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार कहां हुआ ( where invent plastic surgery):-  

यह प्लास्टिक सर्जरी सबसे पहले भारत में ही विकशित हुई ! और अन्य सर्जरीयां  भी सबसे पहले भारत में ही हुई ! उस समय भी एैसी सर्जरी होती थी कि कोई यह तक नही बता पाता था, कि कोई ओपरेशन हुआ है या अंग प्रत्यारोपण हुआ है ! दोस्तों यह शल्य चिकित्सा या प्लास्टिक सर्जरी लगभग 2500 साल पहले, भारत के एक महान ऋषि और चिकित्सक सुश्रुत द्वारा की गई थी ! तो इस तरह यह विद्या भारत ने ही दुनिया को दी है ! कमर दर्द के लिए आप यहाँ क्लिक करें 

प्लास्टिक सर्जरी की सुने कहानी (history and story of Plastic surgery ):-

दोस्तों जो आज की दुनिया की आधुनिकतम विद्या है सर्जरी ! इसका आविष्कार भारत में ही हुआ है, सर्जरी के साथ साथ प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार भी यहीं हुआ है ! राजीव दीक्षित जी ने पुराने दस्तावेजों के आधार पर एक कहानी बताई जो यह साबीत करती है कि यह प्लास्टिक सर्जरी की विद्या भारत की ही देन है ! इसमें आगे वे कहते हैं कि 1780 में दक्षिण भारत का एक बहुत महान व्यक्ति, जिसने देश को आजाद रखने में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान दिया ! उसने देश की आजादी की रक्षा में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया ! उसका नाम था “हदरअली” ये वही हदरअली है जो उस समय दक्षिण भारत के सम्राट हुआ करते थे ! और आजकल हम जिसको कर्नाटक कहते है ! उस समय कर्नाटक के बहुत बड़े भू भाग पर हदर अली का ही राज था ! उस समय 1780 – 1784 के बीच अंग्रेजों ने हदरअली के सम्राज्य पर बहुत हमले किये ! सीमेंट से 1000 गुना अच्छा था हमारा चुना जाने कैसे 

एैसे ही एक हमले का जिक्र एक अंग्रेज की डायरी में मिला, और वो मै ( राजीव दीक्षित ) सुना रहा हूँ आपको ! उस समय भारत में एक अंग्रेज आया जिसका नाम था “कर्नल कूट” ! और उसने हदर अली पर हमला कर दिया और यह घटना 1780 की है ! उस हमले में हदर अली ने अंग्रेजों को परस्त कर दिया ! और हदर अली का यह इतिहास रहा कि, जब – जब अंग्रेजों ने उस पर हमला किया तब – तब उसने अंगेजो को हराया ! अंग्रेज एक बार भी उससे जीत नही पाए ! वे हर बार आते थे, हमला करते थे और हार कर चुप –चाप चले जाते थे ! और एैसे ही जब हदर अली पर अंग्रेजों के बार – बार हमले हुए तो उसको थोडा गुस्सा आ गया ! और जब यह कर्नल कूट भारत आया और उसने हदर अली पर हमला कर दिया ! तो हदर अली ने उसे हरा दिया ! और गुस्से में आकर कर्नल कूट की नाक काट दी ! उस समय हमारे भारत में नाक कटना सबसे बढ़ी बदनामी होती थी !

आप जानते हैं पुरे रामायण की कहानी नाक कटने के उपर ही है ! जो सरुपन खां की नाक न कटी होती तो यह रामायण भी ना होती ! और कर्नल कूट अपनी डायरी में लिखता है कि, युद्ध में हार गया था इसलिए हदर अली के सिपाही उसको पकडकर हदर अली के सामने ले गये, हदर अली सिंघासन पर बैठा था ! और मै उसके चरणों में जमीन पर ! वो चाहता तो एक झटके में मेरी गर्दन काट सकता था ! लेकिन उसने मेरी गर्दन नही काटी बल्कि मेरी नाक काट दी ! और फिर मुझे छोड़ दिया कि जाओ , और कहा यह कटी हुई नाक लेकर जाओ ! और सबको बताओ कि तुम्हारी नाक क्यों कटी ! तो आगे कर्नल कूट लिखता है कि मुझे एक घोडा दे दिया भागने के लिए ! और नाक काट कर मेरे हाथ में रख दी और कहा भाग जाओ, तो मै घोड़े पर बैठ कर भागा !

और वहाँ से भागते भागते – भागते एक जगह लिखता है वो कि मैं बेलगाँव आ गया ! बेलगाँव जो कर्नाटक का एक जिला है ! वहाँ एक वैद्य ने मुझे देख लिया नाक से खून निकल रहा है ! और कटी हुई नाक मेरे हाथ में है तो इस पर वैद्य ने कहा यह नाक कहाँ कटगयी ! तो कर्नल कूट ने झूठ बोला और कहा कि पथर मार दिया किसी ने, तो इस पर वैद्य ने कहा यह पथर मारी हुई नाक नही ! बल्कि यह तो तलवार से काटी गयी है ! मै एक वैद्य हूँ मै जानता हूँ, तो इस पर उस वैद्य ने पूछा किसने काटी ! तो मैने जवाब दिया तुम्हारे राजा हदर अली ने काटी, क्यों काटी ? तो मैने कहा मै उससे युद्ध हार गया इस लिए काटी ! तो इस पर वैद्य कहता है कि यह कटी नाक लेकर इंग्लेड जाओगे ? इस पर मैने कहा इच्छा तो नही है लेकिन इसके अलावा कोई चारा भी तो नही ! वैद्य इतना दयालु और क्रपालु था कि उसने कर्नल कूट से कहा मै तुम्हारी नाक जोड़ सकता हूँ ! इस पर आश्चर्यचकित कर्नल कूट कहता है कि, मैने तो कभी सुना नही कि एक अंग जब कट जाए तो वह दुबारा जुड़ भी सकता है ? तो वैद्य जी ने कहा मै जोड़ सकता हूँ कर्नल कूट ने कहा जोड़ दो ! वैद्य जी उसको अपने घर ले गये और उसका ओप्रेशन किया और उस ओप्रेशन का तीस पन्नों में वर्णन है !

( राजीव दीक्षित ) मै आपको तीसों पन्नों में जो लिखा था वो तो नही सुना सकता ! लेकिन अन्त में जो हुआ वो सुना रहा हूँ, वो ओप्रेशन सफल रहा नाक उसकी जुड़ गयी ! और वैद्य जी ने उसे एक लेप बनके दे दिया ! और कहा इसको हर रोज सुभह श्याम लगाते रहना, वो लेप कर्नल कूट ले गया और 15 से 17 दिनों में ही नाक उसकी जुड़ गयी ! और फिर वह जहाज में बैठ कर लन्दन चला गया ! और इसके तीन महीने बाद वह ब्रिटिश पार्लियामेंट में भाषण दे रहा है ! और सबसे पहले सभी से यह पूछता है कि आपको लगता है, कि मेरी नाक कटी हुई है ? तो इस पर सब हरान होकर पूछते है, कि आपकी नाक तो कटी हुई नही लगती ! तो इस पर कर्नल कूट फिर सारी आपबीती बताता है !

की कैसे वह हदर अली से हारा और उसने उसकी नाक काटी ! और भारत में ऐसे वैद्य हैं जिनके पास एैसा हुनर है, कि जो कटी हुई नाक को भी जोड़ सकते है ! तब उस वैद्य जी कि खबर उस ब्रिटिश पार्लियामेंट में ली गयी ! और अंग्रेजों का एक दस्ता बैल आया और बेलगाँव के उस वैद्य को मिला ! तो उस वैद्य जी ने बताया कि यह काम तो भारत के सभी गाँव में होता है ! मै अकेला नही एैसा काम करने वाले, हजारों लाखों लोग हैं ! तो अंग्रेजों को हरानी हुई और पूछा कौन सिखाता है आपको ? इस पर वैद्य जी ने कहा हमारे यहाँ इसके गुरुकुल चलते हैं ! उन गुरुकुलों में यह सिखाया जाता है ! फिर वे अंग्रेज उन गुरुकुलों में गये भर्ती हुए यानि एडमिशन लिया और सिखा ! और यहाँ से सिखने के बाद उन्होंने इंग्लेंड में जाकर प्लास्टिक सर्जरी शुरू की ! और जिन अंग्रेजों ने सर्जरी करनी सीखी यह सब उनकी डायरियों में लिखा है ! बिजली का अविष्कार किसने किया 

सर्जरी सीखने वाले डॉक्टर थामस क्रूसो ( Doctor Thomas crusoe) की कहानी :-

एक बार एक और अंग्रेज कि डायरी में यह लिखा मिला था ! कि जब मैने प्लास्टिक सर्जरी सीखी और जिस गुरु से सीखी वह भारत का विशेष व्यक्ति था ! और वह एक नाइ था जाती का उसने मुझे सिखाया ! ( राजीव दीक्षित ) अब यह बात ध्यानपूर्वक सुनना कि जाती का नाइ, जाती का चर्मकार, जाती का कोई और हमारे यहाँ ये बहुत बड़े ज्ञानी थे ! ज्ञान के बढ़े पंडित थे ये लोग ! नाइ है इस आधार पर उसका गुरुकुल में प्रवेश वर्जित नही था ! चर्मकार है उसका प्रवेश वर्जित नही था ! जाती के आधार पर हमारे गुरुकुलों में कभी भी प्रवेश नही हुआ है ! और जाती के आधार पर शिक्षा कि हमारे यहाँ कोई व्यवस्था भी नही रही ! और वर्ण व्यवस्था के आधार पर हमारे यहाँ सब कुछ चलता रहा है ! तो इसलिए यहाँ नाइ भी सर्जन है, और चर्मकार भी सर्जन हैं ! और वो अंग्रेज लिखता है कि एक चर्मकार तो सबसे अच्छा प्लास्टिक सर्जरी सर्जन है ! क्योंकि उसको चमडा सबसे अच्छा सिलना आता है ! तो शरीर का चमडा सिलना हो या जानवर का बात तो एक ही है ! इस लिए भारत में एैसे लोग सर्जरी सीखते रहे ! तो एक अंग्रेज कह रहा है जिस गुरु से मैने सर्जरी सीखी, यह किस्सा पूणे का है ! वो अंग्रेज और उसका गुरु जात का नाइ था और सिखाने के बाद उसने मुझसे एक ओपरेशन कराया और यह उस ओपरेशन का वर्णन है :-

यह 1792 की कहानी है एक मराठा सैनिक आया, जिसके युद्ध में दोनों हाथ कट गये थे ! और वो उस गुरु के पास आया है कटे हुए हाथ लेकर जोड़ने के लिए ! तो गुरु ने वो ओपरेशन अंग्रेज से करवाया जो अंग्रेज सीख रहा है ! और उस अंग्रेज ने गुरु के साथ मिलकर सफलतापूर्वक ओपरेशन पूरा किया है ! और वो अंग्रेज जिसका नाम है “डॉक्टर थामस क्रूसो” यह अंग्रेज कहता है कि, मैने मेरे जीवन में इतना बढ़ा ज्ञान सिखा प्लास्टिक सर्जरी और मेरे गुरु ने इसके बदले एक पैसा नही लिया ! कोई फ़ीस नही ली और मै ये अचम्भा मानता हूँ आश्चर्य मानता हूँ ! थामस क्रूसो यहाँ से सीखकर गया है ! और फिर उसने अपना प्लास्टिक सर्जरी का स्कुल खोला, और उसी प्लास्टिक सर्जरी के स्कुल में अंग्रेज सीखे हैं ! और उन्होंने सीख सीख कर दुनिया में फैलाया है ! दुर्भाग्य इस बात है कि सारी दुनिया में अंग्रेजों के उस स्कुल का तो वर्णन है ! लेकिन विश्व ग्रंथो में इन वैद्यों का कोई वर्णन नही आया, जिन्होंने अंग्रेजों को यह प्लास्टिक सर्जरी सीखाई थी !

प्लास्टिक सर्जरी की अधिक जानकारी के लिए राजीव दीक्षित जी का यह वीडियो जरुर देखें  >>

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