खाने का सही समय और मात्रा आयुर्वेद के अनुसार

खाने का सही समय व मात्रा हमारे आयुर्वेद में हजारों सालों से लिखी गई हैं !
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खाने का सही समय और मात्रा आयुर्वेद के अनुसार

खाने का सही समय व मात्रा हमारे आयुर्वेद में हजारों सालों से लिखी गई हैं ! जो हमारे आयुर्वेद के ज्ञाताओं ने दिये हैं ! उन्होंने भोजन के प्रारूप को उतम ढंग से समझाया गया  है ! हमारे ऋषियों का मानना है, कि भोजन भी एक यग का ही रूप है ! जिस तरह हम यग में धधकती अगनी को शांत करने के लिए आहुति ढलते हैं ! ठीक वैसे ही मनुष्य शरीर के अंदर की आग, यानी जठराग्नि जो हमारे उदर या पेट में धधकती रही है ! उसको शान्त करने के लिए हम भोजन करते है ! जैसे यज्ञ के कुछ नियम और समय सामग्री होता है ! वैसे ही हमारे यज्ञ यानी खाने का सही समय और मात्रा सभी बन्धे हुए होने चाहिए, तभी उसका हमारे शरीर को भरपूर फायदा मिल सकता है !

महऋषि वाग्भट जी द्वारा बताये गये नियम Rules for eating food by VagBhatt

हमारे आयुर्वेद सहिंता में महऋषि वाग्भट जी का बहुत बढ़ा योगदान रहा है ! उन्होंने आयुर्वेद में बहुत बढ़ी – बढ़ी रिसर्च की हैं ! और उनके आधार पर एक पुस्तक लिखी जिसका नाम है, “अष्टांग हृदयं” और इस पुस्तक में उन्होंने 7000 सूत्र लिखे हैं ! उनके ये सभी सूत्र प्रमाणिकता सिध्द करते है ! इन सभी सूत्रों का महऋषि वाग्भट जी खुद सटीकता से पालन करते थे ! वे 135 साल तक जीवित रहे, और वे कभी बीमार नही हुए  ! जो मानव इनका पालन करता है, वह आपने शरीर को सदा स्वस्थ व हष्ट पुष्ट रख सकता है ! महऋषि वाग्भट जी ने खाने के सम्बन्द में बहुत ही स्टिक सूत्र दिये हैं ! जैसे खाने का सही समय क्या है ? कितना खाना है ?

महऋषि वाग्भट के अनुसार खाने का सही समय Right time for eating by VagBhatt

भोजन के विषय में महऋषि वाग्भट जी कहते हैं, कि हमारे खाने का सही समय निश्चित होना चाहिए ! और हमे कभी भी – कुछ भी नही खाना चहिए ! खाने के विषय में विस्तार से बताते हुए वे लिखते हैं, कि जिस समय हमारे उदर अग्नि, यानी जठराग्नि प्रज्वलित होती है ! अर्थात जब हमे भूख अच्छी होती है, हमे उस समय खाना चहिए ! वो समय सब से सही होता है, उस समय खाया हुआ भोजन सही से पाच जाता है ! अन का एक भी हिसा खराब नही जाता, इससे हमे भरपूर मात्रा में ऊर्जा और शक्ति मिलती है ! इसके अलावा हमारे शरीर में कोशिकाएं, मांस, रस, रक्त, मूत्र, मेद, वीर्य बनता है ! इससे हमारी हड्डियों का भी विकाश होता है !

दिन में कितनी बार भोजन करना चाहिए ? How many time eat in a day

और आगे बताया गया है कि ये कुछ भी और कभी भी खाने की संस्कृति हमारी नही ! ये यूरोप के देशों की है, क्योकि वहाँ के लोग डॉक्टर्स को ज्यादा मानते है ! इसलिए उनकी संस्कृति में आयुर्वेद का एक भी ज्ञाता नही हुआ, क्योंकि उनकी संस्कृति कुछ समय पहले ही विकशित हुई    है ! उनके डॉक्टर कहते है, कि थोड़े – थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहना चहिए ! लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह ठीक नही ! महऋषि वाग्भट जी कहते है, की खाने का सही समय निश्चित होना चाहिए ! उनके अनुसार यदि हम थोड़े समय के अन्तराल पर कुछ न कुछ खाते रहे, तो हमारे शरीर की जठराग्नि कभी भी सही रूप से प्रज्वलित नही होगी ! व हमारा खाया हुआ भोजन कभी भी नही पच पाएगा !  इसलिए भोजन का समय निर्धारित करने पर जोर दिया गया है !

सुबह खाना – खाने का सबसे सही समय Best time for eat breakfast

महर्षि वाग्भट जी ने इसके ऊपर काफी रिसर्च की है ! वे लग – भग 2 साल तक इस पर खोज करते रहे, कि खाने का सबसे सही समय कौन सा है ! और वे निष्कर्स पर पहुंचे, तब उन्होंने दुनिया को खाने का सही समय बताया ! उन्होंने कहा जब जठराग्नि सबसे तेज होती है!

सुबह के खाने का सबसे सही समय जब सूरज का उदय होता है, उस समय से लेकर दो से ढाई घंटे के अंदर हमे भोजन कर लेना  चाहिए ! महऋषि वाग्भट जी के अनुसार हर एक जगह सूर्य के निकलने का टाइम अलग – अलग हो सकता है ! लेकिन हम चाहे कहीं पर भी हों, यही समय खाने का सही समय बताया गया है ! इसी समय को सबसे उतम माना गया है !

खाना खाने का सही समय और मात्रा कितनी होनी चाहिए

महऋषि वाग्भट जी ने समय के साथ – साथ, खाने के विषय में और भी बहुत कुछ बताया है ! महऋषि वाग्भट जी कहते हैं, कि सारे मन पसंद खाने हमे सुबह ही खाने चाहिए ! क्योकि उस समय ही जठराग्नि सबसे ज्यादा तेज होती है ! तो खाना चाहे कितना भी हेवी हो, जैसे कि परांठा, जलेबी, समोसा या कोई भी तली हुई वस्तु ये हमेशा हमे सुबह ही खाने चाहिए ! फिर आप बोलेंगे की भूख तो दोपहर को भी लगती है ! कोई बात नही आप दोपहर को भी थोडा खा लीजिये !

लेकिन महऋषि वाग्भट जी कहते है, कि जब आप दोपहर को खाते हैं ! उसको सुबह के खाने यानी नाश्ते से १/३ कम कर दीजिये ! और एैसे ही रात का खाना भी दोपहर के खाने से १/३ कर दीजिये ! यानी साफ शब्दों में कहें कि जैसे आप सुबह 6 रोटी खाते हैं, तो दोपहर को 4 खानी हैं ! और रात को सिर्फ 2 ही खानी हैं !

खाना खाने में मन की सन्तुष्टि क्यों जरूरी है ? Why Eating satisfaction is must

वे कहते है की हमे मन की शन्तुष्टि के लिए सुबह ही पेट भर कर खा लेना चाहिए ! क्योकि मन की शन्तुष्टि पेट की शन्तुष्टि से ज्याद महत्वपूर्ण   हैं ! महऋषि वाग्भट जी कहते है, कि जब मन शन्तुष्टि होता है तो यह हमारे शरीर के अंदर “हार्मोन्स और एन्जैम्स” पैदा करता है ! जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं ! लेकिन यदि मन शन्तुष्टि नही है, तो मनुष्य में बहुत सी बीमारियाँ आ जाती हैं ! व इसका करण होता है  “हार्मोन्स और एन्जैम्स”  का न बनना, इससे सिझोफ्रनिया और डिप्रेशन के शिकार भी हो सकते है ! इसके अलावा खाने का सही समय निरधारित न करने से  27 तरह की बीमारियाँ मनुष्य को घेर लेती हैं, यदि उसका मन शन्तुष्टि और प्रसन न हो !

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 राजीव दीक्षित जी के अनुसार खाना –खाने का सही समय व नियम 

 राजीव जी ने भी खाने का सही समय पर घहरा चिन्तन किया है ! उनका कहना है कि इस पर उन्होंने काफी ध्यान दिया है, और उन्होंने पाया है कि मनुष्य को छोड़ कर सभी प्राणी इन नियमो का पालन करते है ! जो महऋषि वाग्भट जी ने कहे ! मनुष्य अपने को सबसे ज्यादा होश्यार मानता है, लेकिन इस संसार में अनके जीव व प्राणी उससे ज्यादा समझदार हैं !

इसमें अब आप चिड़िया को ही ले लीजिये, वह हर रोज और हर जगह सबसे पहले उठ जाती है ! सुबह उठते ही सबसे पहले पेट भर कर खाती है ! खाने के 4 घंटे बाद पानी पीती है ! आप चेक कर सकते है, चिड़िया को कभी भी शुगर, बी. पी. नही होता ! उसका वजन भी एकदम सही रहता है ! वो कभी मोटी या पतली नही होती, और एैसे ही कितने उदाहरण हमे जीव जगत में मिल जाएँगे ! भेड़, बकरी, घोडा, भैंस, गाय सभी को खाने का सही समय पता है ! सब सुबह उठते ही खान खाते है, और पेट भरकर खाते हैं ! ये सभी जानवर मनुष्यों से ज्यादा स्वस्थ होते हैं, और ये कभी बीमार भी नही होते !

रवीन्द्रनाथ सांगवान जी द्वारा की गई रिसर्च :-

राजीव भाई कहते है कि उनके एक मित्र डाक्टर रवीन्द्रनाथ सांगवान जी हैं ! जो एक बहुत बढ़े प्रोफेसर हैं, और मेडिकल कोलेज में काम करते हैं ! वे कर्नाटक में उडुपी नामक स्थान पर रहते हैं ! उन्होंने बन्दर पर एक घहरा एक्सपेरिमेंट किया, कि बन्दर को बीमार करो, तो इसके लिए उन्होंने बन्दर के शरीर में लगातार 15 साल तक बहुत तरह के वायरस Virus इंजेक्ट किये ! और भी कई माध्यमों से वायरस Virus को बन्दर के शरीर में एंट्र किया, लेकिन बन्दर बीमार नही हुआ, वे इसमें असफल रहे ! इस पर राजीव भाई कहते है कि यह कैसे समभव है, कि इतना कुछ करने पर बन्दर बीमार न हो ! तब रवीन्द्रनाथ जी ने एक रहस्य की बात बताई, जो हमे आज तक किसी ने भी नही बताई होगी ! कि बन्दर का HR FACTOR दुनिया के सभी प्राणियों से श्रेष्ठ है !

और जब कभी किसी का HR FACTOR टेस्ट करवाया जाता है, तो डोक्टर बन्दर के HR FACTOR से ही उसकी तुलना (Comparison) करता है ! ये अलग बात है कि वह यह बात बताता नही ! बन्दर को कभी कोई बीमारी नही आती, उसका कोलोस्ट्रोल कभी नही बढ़ता, उसको शुगर कभी नही होती, उसका बी पी कभी नही बढ़ता, और जितना मर्जी बन्दर को बाहर से शुगर दे लो वह उसके शरीर में नही टिक पाती ! रवीन्द्रनाथ जी कहते हैं कि इस का एक ही राज है ! और वो राज  है कि बन्दर को खाने का सही समय पता है, वह सुबह ही भर पेट भोजन खाता है, लेकिन आदमी नही एैसा नही करता !

सुबह भर पेट खाने के फायदे Benefits of heavy breakfast

रवीन्द्रनाथ जी ने अपने कुछ मरीजों को कहा की आप को हर सुबह भर पेट खाना है ! जैसा महऋषि वाग्भट जी ने भी कहा है ! मरीजों ने एैसा करना शुरू कर दिया, और कुछ समय बाद उनके कुछ मरीज ने बताया कि उनकी शुगर की बीमारी खत्म हो गयी ! कुछ की कमर दर्द खत्म हो गया, नींद अच्छी आने लगी, कोलोस्ट्रोल नोर्मल हो गया ! यही बात खाने का सही समय तो महऋषि वाग्भट जी पैंतीस सौ साल पहले बता चुके हैं ! उनके बताए अनुसार यदि खाने का सही समय और नियम का सही से पालन करें तो हम कभी भी बीमार न हों !

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अधिक जानकारी के लिए राजीव दीक्षित जी का यह वीडियो जरुर देखें >>

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