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राजीव दीक्षित जी , rajiv dixit,rajiv dikshit
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 राजीव दीक्षित जी   :-

साथियों राजीव दीक्षित जी के परिचय में जितनी भी बाते कही जाएँ कम हैं ! कुछ चन शब्दों में उनके जीवन को बयाँ नही किया जा सकता,यह बात वे  लोग बहुत अच्छी तरह समझते हैं जिन्होंने राजीव दीक्षित जी को सुना समझा और देखा है ! फिर भी हमने यहाँ कुछ प्रयास करके उनके जीवन पर प्रकाश डालने की कोशिश की है !परिचय शुरू करने से पहले हम आप सब को यह बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि जो जीवन परिचय हम आप को बता रहे ह ये उनके जीवन का अंश मात्र है !यदि आप उनको पूर्ण रूप से जानना चाहते ह तो आपको उनके व्याख्यानों को सुनना और देखना  पड़ेगा !

राजीव दीक्षित जी का जन्म ३० नवम्बर १९६७ को उतर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरोली गाँव में पिता राधेश्याम दीक्षित और माता मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ !उन्होंने अपनी प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा जिले के एक स्कुल से प्राप्त की इसके बाद उन्हों इलाहाबाद शहर के जे.के. इंस्टीट्यूट से बी .टेक. की और इसके आलावा भारतीय प्रौधोगिकी  संस्थान (India institutes of technology )  से एम्. टेक. उपाधि प्राप्त की ! इसके बाद उन्होंने अपना कुछ समय CSIR( Council of scientific and Industrial Research ) में काम किया ! इसके बाद वे किसी Research Project में भारत के पूर्व राष्ट्रपति (डॉ  ए.पी .जे.अब्दुल कलाम आजाद) के साथ भी कम किया है!

श्री राजीव दीक्षित जी इलहाबाद के जे. के.  इंस्टीट्यूट से बी .टेक की शिक्षा लेते समय ही “आजादी बचाओ आन्दोलन” से जुड़ गये थे ! आजादी बचाओ आन्दोलन के संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे और वे इलहाबाद विश्विधालय में ही गणित विभाग के मुख्य शिक्षक भी थे ! इस संस्था में राजीव दीक्षित जी प्रवक्ता के पद पर थे ! संस्था में श्री अभय प्रताप सिंह,संत समीर जी,केशर जी,राम धीरज जी , मनोज त्यागी जी,और योगेश कुमार मिश्रा जी थे ! शोध करता अपने अपने विषयों पर शोध कार्य कर रहे थे जो कि संस्थान द्वारा प्रकाशित”नई आजादी उद्धोष” नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करते थे ! और दूसरी तरफ राजीव जी अपनी ओजस्वी वाणी से देश की कोने कोने में व्याख्यानों की एक बड़ी श्रंखला बद्ध वैचारिक क्रांति उत्त्पन करने लगे हुए थे  !राजीव जी ने अपने प्रवक्ता पद के उतरदायित्व को एक सचे राष्ट्र भक्त के रूप में अदा किया जो अति अतुल्य और विस्मर्निण है !

बचपन से ही उनमे देश की समस्यों को जानने की गहरी रूची थी ! राजीव दीक्षित जी पढने के बहुत ही शोकिन थे इसलिए लग भग ८०० रुपये वे प्रति माह मैगजीनो और बहुत से अखबारों पर ही खर्च करते थे !वे अभी 9th कलस में ही थे और उन्होंने अपने इतिहास के अध्यापक से ऐसा प्रश्न पूछा जिसका उतर उस अध्यापक के पास भी नही था !जैसा की हमे इतिहास में पढ़ाया जाता ह कि अंग्रेजो का भारत के राजा से प्रथम युद्द 1757 में प्लासी के मदान में रोबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुदोला से हुआ था ! उस युद्ध में सिराजुदोला की हार हुई थी और उसके बाद भारत गुलाम होगया था ! राजीव जी ने अपने अध्यापक से पूछा कि श्रीमान मुझे ये बतायें की उस लड़ाई में अंग्रेजों के कितने सैनिक लड़े ? तो अध्यापक का उतर था कि उनको मालूम नही है तो इसपर राजीव जी ने पूछा क्यों नही मालूम ? तो अध्यापक का उतर था कि उनको किसी ने यह पढ़ाया ही नही तो में तुमको कहाँ से पढूंगा !

एैसा राजीव दीक्षित जी बार- बार पूछते रहते थे कि श्रीमान आप ये बताइये क्या बिना सिपाहियों के कोई युद्ध हो सकता है क्या ? अध्यापक का उतर था कि नही ! तो फिर भाई राजीव दीक्षित जी ने पूछा फिर हमको क्यों नही पढ़ाया जाता कि युद्ध में अंग्रेजों के पास कितने सिपाही थे ?एक और सवाल राजीव जी ने पूछा था कि चलो अंग्रेजों के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नही पता लेकिन जो सिराजुदोला लड़ रहा था भारत की तरफ से उसके पास कितने सैनिक थे ? तो इस पर भी अध्यापक का उतर था कि उनको मालूम नही ! तो खैर इस सवाल का जवाब बहुत बड़ा और गंभीर है कि इतना बड़ा देश कुछ अंग्रेजों का गुलाम कैसे बन गया अगर हम इसको यहाँ लिखेंगे तो यह बहुत बड़ा हो जाएगा !इसके समाधान के लिए आपको राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों को  सुनना और देखना पड़ेगा जिसका नाम “आजादी का असली इतिहास “ है!  तो ऐसे ही अनेकों सवाल उन के मन में घूमते रहते थे ! इसी बीच उनकी मुलाकात प्रो धर्मपाल नाम के इतिहासकार से हुई! प्रो धर्मपाल की किताबें अमेरिका में बहुत पढ़ी जाती हैl

धर्मपाल पाल जी को भाई राजीव दीक्षित जी अपना गुरु मानते है, प्रो धर्मपाल जी  ने राजीव भाई के सवालों के जवाब ढूढने में बहुत मदद भी की थी ! उन्हों ने राजीव जी को वो दस्तावेज़ मुहिया करवाए जो इंग्लेंड की एक लाइब्रेरी “हॉउस आफ कोमनस” में रखे हुए थे !जिनमे अंग्रेजो ने वर्णन किया था कि कैसे उन्होंने भारत को अपना गुलाम बनाया !राजीव दीक्षित जी ने उन सभी दस्तावेजों का घहराई से अध्यन किया और यह जानकारी निकली कि  भारत के बारे में भारत के ही लोगों को बहुत गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है ! इसके बाद उन्होंने सच्चाई लोगों के सामने लेन के लिए गाँव-गाँव ,शहर-शहर जाकर व्यख्यान करने शुरू किये !

इलाहाबाद में पढ़ते हुए उनके एक खास मित्र हुआ करते थे जिनका नाम था योगेश कुमार मिश्रा और योगेश जी के पिता इलाहाबाद में हाईकोर्ट में वकील थे ! राजीव दीक्षित जी और उनके मित्र योगेश उनसे देश की आजादी से जुडी स्चनात्म्क और रहस्यमिय तथ्यों पर वार्तालाप किया करते थे !उसी समय राजीव भाई को देश की  आजादी के बारे में गंभीर जानकारी प्राप्त हुई कि १५ अगस्त १९४७ को देश को कोई आजादी नही प्राप्त हुई बल्कि इसके विपरीत १४ अगस्त १९४७ की रात को नेहरु और अंग्रेज मांउट बटन के बीच एक समझोता हुआ था जिसे सत्ता  (TRANSFER OF POWER AGREEMENT) ह्स्तान्तरण कहते हैं इस समझोते के अनुसार अंग्रेज नेहरु को अपनी कुर्सी देकर जाएँगे और अंग्रेजों के द्वारा बनाए गये 34735 कानून भारत में एैसे के एैसे चलेंगे और क्यों की आजादी की लड़ाई में पूरा देश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के खिलाफ था तो सिर्फ ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत छोड़कर जाएगी और इसके आलावा जो 126 अन्य कम्पनियां जो भारत को लुट रही थी ऐसे ही चलेगी और भारत में व्यपार करेंगी और लुटती रहेंगी और अगर आज देखें तो इनकी संख्या बढकर 6500 हो गयी है !इस बारे में अधिक जानकारी उनके व्याख्यानों से मिलेगी !

यह बात राजीव दीक्षित जी को हमेशा परेशान करती रहती थी कि आजादी के बाद भी देश में अंग्रेजों के बनाएं कानून ऐसे ही चलेंगे और विदेशी कम्पनियां ऐसे ही भारत को लुटती रहेंगी और गोहत्या भी ऐसे की ऐसे चलेगी जेसे अंग्रेजों के समय में चलती थी !  तो एैसी आजादी का अर्थ क्या है ?

यह सब जानकारी प्राप्त करने के बाद भाई राजीव दीक्षित जी ने फिर से एैसा ही आन्दोलन शुरू करने का संकल्प लिया जेसा आजादी के समय अंग्रेजो के खिलाफ “बाल गंगाधर तिलक “ने लिया था !अपने राष्ट्र को फिर से एक महाशक्ति बनाने और पूर्ण स्वतन्त्रता लेन के लिए आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उस का जीवन पर्यन्त पालन किया !और उन्होंने गाँव-गाँव व् शहर-शहर घूमकर भारत की अधूरी आजादी का सच और विदेशी कम्पनीयों की भारतीय लुट के बारे में  बताने लगे और ऐसे ही सन 1999 में राजीव भाई के स्वदेशी व्याखानों की कैस्टों ने देश में धूम मचादी थी !

जब सन 1984 में भोपाल गैस कांड हुआ तब राजीव भाई ने इस षडयंत्र का पता लगाया कि यह कोई घटना नही बल्कि अमेरिका की एक कम्पनी का परीक्षण था ( जिसकी और ज्यादी जानकारी आप को व्याखानों में मिलेगी ) और इसकी जानकारी के बाद राजीव दीक्षित जी ने “यूनियन कारबाईट” कम्पनी के खिलाफ प्रदर्शन किया! और इसी प्रकार उन्होंने अनेकों एतहासिक मोर्चों में भाग लिया और बहुत चोटें भी खाई! इसी तरह  1999 में राजेस्थान के एक गाँव में एक शराब बनाने वाली कम्पनी को सरकार ने लाईसन्स दिया हुआ था जो बहुत ज्यादा मात्र में जमीन से पानी निकल कर शराब बना रही थी उसको गावं वासियों के साथ मिलकर वहाँ से भगाया !

ऐसे ही 1991में चल रहे ग्लोबलाइजेशन और लिबरलाइजेशन को उन्होंने भारतीय उद्योगों का सर्वंनाश करने वाला बताया और पुरे आंकड़ों के साथ इस पर अनेकों व्याखान दिये और भारतीय व्यापारियों को इसके खिलाफ जागरूक बनाया !फिर राजीव दीक्षित जी ने 1994 में किये WTO के समझोते का विरोध किया क्योंकि यह भारत को बहुत बड़ी आर्थिक गुलामी की और धकेलने वाला था !इस समझोते में सरकार ने एैसी सेकड़ों शर्ते मान ली थी जो भारत के किसानो की आत्म हत्या का करण व् रुपय की कीमत डालर से बहुत ज्यादा कम होने का करण ,बड रही बेरोजगारी का करण और खत्म होती स्वदेशी उद्योगों का और अन्य सभी सेक्टर में बढ़ रही विदेशी कम्पनीयों का करण था ,राजीव जी के अनुसार इस समझोते के बाद सरकार देश को नही बल्कि यह समझोता देश को चलाएगा  !

देश की सारी आर्थिक नीतियाँ इस समझोते के अनुकरण पर बनाई जाएंगी और भारत की किसी भी सरकर में हिमत नही की WTO के समझोते को रद कर सके ! राजीव भाई ने बताया की केसे वर्ड बेंक ,यू एन नो और आई ऍम.अफ.आदि संस्थान अमेरिका जेसे देशों के पिट्ठू हैं!ये कैसे विकाशील देशों से पैसा लुटने के लिए इनको पैदा किया गया है! (  WTO के बारे मे ज्यादा जानकारी आप को राजीव भाई के व्याखानों से मिलेगी )

और भी ऐसे ही राजीव दीक्षित जी अपने साथियों के साथ मिल कर राष्ट्रविरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी लड़ाई को और मझबुत करने के लिए पुरे देश में विदेशा कम्पनीयों और अंग्रेजी कानून के खिलाफ अभियान चलाने लगे !एक बार ऐसे ही राजीव भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर “आर्थर डंकल “ अधिकारी जीसने डंकल ड्राफ्ट बनाया था और उसे लागु करवाने के लिए भारत आया को जुते से पिट पिट कर भगाया और इस करण उनको जेल भी हुई !

सन 1999 -2000 में उन्होंने अमेरिका की दो कम्पनियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और वे कम्पनीयां थी पेप्सी और कोक !राजीव जी ने लोगों को जागरूक किया की केसे ये पेप्सी और कोक आपका स्वास्थ्य बिगड़ रही हैं और अरबों रूपये की लुट कर रही हैं !राजीव भाई ने इन कम्पनीयों के प्रचार और विज्ञापन करने वाले खिलाडियों और एक्टरों का बहिष्कार करने को कहा !

सन 2000 में 9 -11 की घटना घटी तो ईक अख़बार वाले राजीव भाई के विचार जानने के लिए उनके पास पहुंचे तब भाई राजीव दीक्षित जी ने कहा था कि मुझे यह कोई आतंकवादी घटना नही लगी और उन्होंने कहा यह काम अमेरिका ने खुद ही किया है और तब सभी पत्रकार पूछ रहे थे कि उनके पास क्या सबूत हैं?इस पर राजीव भाई ने कहा की थोडा समय दीजिये आपको सबूत भी मिलजेगा !और फिर 2007 में गुजरात के  एक व्याखान में उन्होंने पूरा सच प्रोजेक्टर के माध्यम से लोगों के सामने रखा !

9 सितम्बर 2013 को रूस ने भी एक वीडियो दिखाया जिसमे 9 -11 की अमेरिकी घटना को पूर्णतय झूठा बताया गया !और ऐसे ही 2003-4 में सरकार द्वारा लागु किये गये WTO के विरोध में बहुत व्याखान दिये और व्यापारियों को बताया कि केसे WTO कानून आपकी आर्थिक लुट से ज्यादा आपके धर्म को कमजोर करेगा और भारत में ईसायत को बढ़ावा देगा !

राजीव भाई ने ऐसे ही गो हत्या को रोकने के लिए भी बहुत कड़ा संघर्ष किया और भाई राजीव दीक्षित जी का कहना था कि जब तक लोगों को गाय माता का आर्थिक मूल्याकं नही मालू होगा  हम लोगों को नही समझाते तब तक भारत में गो रक्षा नही हो सकती !क्योंकि भारत में आज तक कोई भी सरकार गोरक्षा बिल पास नही कर सकी ,राजीव भाई का कहना था कि पता नही कब संसद में गोहत्या के खिलाफ बिल पास होगा या नही !क्योंकि आजादी के 65 साल बीत चुके हैं और आज तक कोई ऐसा बील पास नही हुआ और सायद ही ऐसा बील पास होगा इसलिए राजीव भाई कहते थे कि हमे अपने स्तर पर ही प्रयास करना चाहिए !

भाई राजीव दीक्षित जी ने गाँव-गाँव घूमकर व्याखानों के माद्यम से गाय माता के सांस्कृतिक,धार्मिक और आर्थिक महत्व लोगों को बताया उन्होंने बताया की केसे किसान देशी खेती करके , रासायनिक खाद और यूरिया डाले बिना गो माता के मूत्र और गोबर से ही ओर्ग्निक खेती कर सकते हैं! इजससे उनका खर्च भी कम होगा और आय भी बढेगी !आज किसान टनों टन रासायनिक खाद खेतों में डाल रहे हैं और महेंगे से महंगा कीटनाशक खेत में छिडक रहे हैं इजससे उसका खर्च भी बढ़ रहा है और उत्पादन भी काफी कम हो रहा है ! रासायनिक खाद और यूरिया से पैदा हुए फल सब्जियां और अनाज खाकर लोग बीमार हो रहे हैं !       राजीव भाई ने गरीब किसानों को गाय न बेचने की सलाह देते थे और गाय के गोबर व् मूत्र से ही खेती करने के सूत्र बताए और फिर किसानों ने खेती करनी शुरू की और उन किसानों की आर्थिक आय में काफी सुधर आया !

सन  1998 में राजीव भाई ने कई गोरक्षा समितियों के साथ मिलकर कोर्ट में मुकदमा दायर करदिया था कि गाय हत्या नही होनी चाहिए !और सामने बैठे कसाइयों ने कहा क्यों नही होनी चाहिए !कोर्ट में ये साबित करना था कि गाय को मरकर मांस बेचने से ज्यादा लाभ नही बल्कि गाय को पलने से ज्यादा लाभ मिलता है!  कसाइयों की तरफ से बड़े बड़े वकील जिनकी फ़ीस बहुत मोटी मोटी होती है जेसे 50 -50 लाख जैसे कि सोलीसोराबजी की फ़ीस  बीस लाख और कपिल सिबल की 22 लाख फ़ीस है! महेश जेठ मलानी राम जेठ मलानी का बेटा जिसकी फ़ीस 35 से 40 लाख तक है ऐसे सारे वकील कसाइयों की तरफ थे और एक ओर राजीव भाई और समितियों के साथ कोई वकील नही था क्योंकि उनके पास पैसा नही था और इन लोगों ने अपना मुकदमा खुद लडा ( इस मुकदमे की सारी जानकारी राजीव भाई की व्याखान से मिलजाएगी )

और हाँ आप को बता दे कि 2005 में  यह मुकदमा राजीव भाई और संस्थाओं ने जीता लिया ! राजीव दीक्षित जी ने गाय के एक किलो गोबर से तेतीस किलो खाद तेयार करने का फार्मूला अदालत में बताया और करके भी दिखाया जिससे हर रोज 1800 से 2000 रूपये की कमाई की जा सकती है और ऐसे ही राजीव भाई ने गाय के मूत्र से बनने वाली ओषधियों का आर्थिक मूल्याकं करके बताय !और राजीव भाई ने एक बढ़ा कमाल कर दिया उन्होंने सुप्रीमकोर्ट के जज की गाड़ी गोबर से बनी गेस से चला दी और जज ने 3 महीनों तक अपनी गाड़ी उसी गेस से चलाई और ये सब देखकर विरोधियों ने दांतों तले दबाली !

भाई राजीव दीक्षित जी ने देखा कि जैसे खाद बनाने वाली कम्पनीयां देश को लुट रही हैं तो दूसरी और दवा बनाने वाली विदेशी कम्पनियां भी भारत को दिन रात लुटने में लगी हुई हैं और तो और ये कम्पनीयां हमारे देश में वे दवाएं बना और बेच रहें हैं जो लग भग सभी यूरोपी और अमेरिकी देशों में बंद हैं !इन दवाओं से न केवल रूपये की लुट हो रही है अपितु लोगों का स्वस्थ भी खराब हो रहा है! तब राजीव भाई ने इन कम्पनीयों के खिलाफ आन्दोलन शुरू किया !  ३५०० वर्ष पुराने आयुर्वेद के रचयता चरक के शिष्य वगभट महर्षि को दिनों दिन बहुत घहराई से अध्यन किया और आयर्वेद के एक्सपेरीमन्ट किये और गाँव-गाँव घूम कर आयर्वेद के बारे में व्याखान दिये और लोगों को बताया की केसे बिना कोई दवाई खाए कुछ नियम का पालन करके आप खुद को स्वस्थ रख सकते हो और स्वस्थ जीवन जी सकते हो ! राजीव भाई का कहना था कि हम खुद अपनी 85% चीकितसा कर सकते हैं ! और राजीव भाई खुद भी 15वर्षों से इन नियमो का पालन करते थे और कभी भी बीमार नही हुए और न ही कभी किसी डोक्टर के पास गये !राजीव भाई आयुर्वेद के इतने बड़े ज्ञाता हो गये थे की लोग उनके आयुर्वेद के व्याखानों के दीवाने हो गये थे ! वे लोगों को बताते थे की केसे गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज वे अपने आप कर सकते हैं जैसे कि दमा ,अस्थमा ,शुगर ,बी.पी,एलर्जी ,हार्ट ब्लोकेज ,कोलेस्ट्रोल आदि ! वे लोगों को सबसे पहले बीमारी का करण समझने को कहते थे और फिर इलाज के लिए कहते थे ! लोग उनके आयुर्वेद के लेक्चर के दीवाने होगये थे !उन्होंने आयुर्वेद केआलावा होम्योपैथी में भी अच्छी जानकारी थी और इसमें उन्हें इसमें डिग्री भी हासिल की थी !

एक बार राजीव भाई को खबर मिली कि उनके गुरु की लकवे के करण आवाज चली गयी है  और उनके हाथ और पांव ने काम करना बन्द कर दिया है और उनको हस्पताल में बांध कर रखा हुआ है तो राजीव भाई तुरंत वहाँ पहुंचे और धर्मपाल जी को अपने साथ घर ले गये और उनको 3 दिन होम्योपैथीक दवाई दी और इससे धर्मपाल जी की आवाज वापिस आगयी और लग भग १ सप्ताह में वे चलने फिरने लग गये थे कोई यकीन नही कर पा रहा था कि उनको कोई बीमारी भी हुई थी !

ऐसे ही एक बार कर्नाटक राज्य में बहुत भयानक चिकनगुनिया बुखार आया हुआ था लोग बुखार से मर रहे थे तब राजीव भाई अपनी टीम के साथ वहाँ पहुंचे और अपनी आय्रुवेदिक और होम्योपैथीक इलाज से हजारों -हजारों लोगों की जान बची ! यह सब देख कर वहाँ की सरकार ने अपनी डाक्टरों की टीम को राजीव भाई के पास जाकर उनसे सिखने के लिए कहा की वो कैसे मरीजों को ठीक कर रहे हैं ?(अधिक जानकारी के लिए राजीव भाई के व्याखानों को सुने और देखें )

इसके अतिरिक्त भाई राजीव दीक्षित जी ने यूरोप और भारत की सभ्यता और संस्कृति का घहराई से अध्यन किया और समाज को बताया कि केसे लोग यूरोप के लोगों की मजबूरी को अपना फेशन बना कर उनकी नकल और बिमारियों का शिकार हो रहे हैं और भाई राजीव दीक्षित जी का कहना था कि केसे भारत का पश्चमीकरण हो रहा है ! और उनका कहना था की इसका एक मात्र करण अंग्रेजों के मैकाले का बनाया हुआ ( INDIAN EDUCATION SYSTEM) है ! क्योंकि आज भी भारत में अंग्रेजों द्वारा चलाए गये कानून और मैकाले का बनाया हुआ शिक्षा तन्त्र चल रहा है ! भाई राजीव दीक्षित जी का कहना था कि इस मैकाले ने जब हमारा शक्षा तन्त्र बनाया तब उसका कहना था की मेने भारत का ऐसा शिक्षा तन्त्र बना दिया कि जिसको पढने वाला व्यक्ति सकल से तो भारतीय होगा लेकिन अक्ल से वह पूरा अंग्रेज होगा और उसकी आत्मा अंग्रेजों जेसी होगी और भारत की हर चीज में उसको पिछड़ा पन नजर आएगा ! और उनको अंग्रेजी और अंग्रेजियत ही सबसे बढिया लगेगी और इतना ही नही मैकाले का कहना था की मैने भारत की न्याय व्यस्था को तोडकर IPC OR CPC जेसे कानून बनाए जिसमें गरीब व्यक्ति को कभी न्याय नही मिल सकता ! ऐसे मुकदमे सालों साल लटकते रहेंगे और मुकदमों में सिर्फ फेंसले आएंगे लेकिन न्याय किसीको नही मिलेगा ! राजीव भाई ने इस अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए बहुत व्याखन दिये और भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति की प्राथमिकता को समझाया !उन्होंने अपने एक मित्र आजादी बचाव आन्दोलन के कार्य करता पवन गुप्ता के साथ मिल कर एक गुरुकुल की स्थापना भी की थी ! इसमें वहाँ के फेल बच्चों को दाखिल करते थे और उनको प्राचीन पद्धति से पढ़ते थे वे बच्चे ऐसे मेधवी बने कि आधुनिंक शिक्षा में पढ़े बढ़े बढ़े वज्ञानिक भी उनके ज्ञान के आगे दांतों तले उँगलियाँ दबाते थे !

राजीव भाई राम राज्य की कल्पना करते थे और इसको समझने की लिए वे भारत के साधू ,संतों से मिले लेकिन एक भी संत उनकी जिज्ञासा को संत नही कर पाया तब उन्होंने भारत में मिलने वाली लग –भग सभी रामायणों का अध्यन किया और समझा कि भारत की सारी  समस्याओं का समाधान तो रामायण में ही निहित है,इसके बाद वे खुद राम कथा करने लगे उनकी राम कथा संत बाबाओं से बहुत ही न्यारी थी वे हमेशा न्याय ,सत्य वाले विषयों पर अधिक चर्चा करते थे !और उनका कहना था की भारत की सभी समस्याओं का समाधान इस में निहित है ! ( आप उनकी राम कथा उनके व्याख्यानों के माध्यम से सुन सकते हैं )

सन २००९ में वे बाबा राम देव के सम्पर्क में आये और भाई राजीव दीक्षित जी ने बाबा को देश में चल रही गंभीर समस्याओं और उनके समाधान से परिचित करवाया और विदेशों में जमा काले धन के विषय में बाबा को अवगत करवाया और उनके साथ मिलकर आन्दोलन को आगे बढ़ाने का फेसला लिया !आजादी बचाव के कुछ कार्य करता उनके इस फेसले से खुश नही थे फिर भी राजीव भाई ने 5 जनवरी २००९ को भारत स्वाभिमान आन्दोलन की नीव रखी ! जिसका मुख उदेश्य देश के लोगों में जागरूकता लाना और आयुर्वेद और योग को बढ़ावा देना व् लोगों को स्वस्थ बनाना और लोगों को अपनी विचारधरा में जोडकर उनको देश की समस्याओं और उनके समाधान के बारेमे जानकारी देना और भारत स्वाभिमान आन्दोलन में जुडकर २०१४ में अच्छे लोगों को जोडकर एक राजनेतिक पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत में चल रही अंग्रेजियत पूर्णतय को खत्म करना ,विदेशों में जमा काला धन वापस लाना और गोहत्या पूर्णतय बन्द करवाना यदि हम ये कहें की आन्दोलन समपूर्ण आजादी के लिए शुरू किया गया था तो   अति स्योक्ति ना होगी !

केवल ढाई महीनों में राजीव भाई ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से छ लाख लोगों को इस आन्दोलन से जोड़ दिया था !  राजीव भाई पतंजली में भारत स्वाभिमान कार्य कर्ताओं के बीच व्याख्यान दिया करते थे जिनको आस्था चेनल के माध्यम से पुरे भारत में प्रसारित किया जाता था और इसप्रकार अप्रत्यक्ष रूप से भारत स्वाभिमान आन्दोलन के साथ कुछ ही दिनों में 3 से 4 करोड़ लोग जुड़ गये थे और राजीव भाई भारत स्वाभिमान आन्दोलन को लेकर गाँव गाँव व् शहर शहर निकले और पहले की तरह व्याखानों के माध्यम से भारत के लोगों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया !

इसी दोरान लग-भग आधे भारत की यात्रा करने के बाद भाई राजीव दीक्षित जी 26नवम्बर 2010 को वे उड़ीसा से छतीसगढ़ राज्य के एक शहर रायगढ़ पहुंचे और उन्होंने २ जनसभाएं समबोदित की इसके बाद अगले दिन 27नवम्बर 2010 को वे जंजगिर में 2 विशाल जन सभाएं करने के लिए पहुंचे और 28 नवम्बर को बिलसपुर जिले में व्याख्यान के बाद 29 नवम्बर को छतीसगढ़ के दुर्ग जिले में पहुंचे ! उनके साथ छतीसगढ़ राज्य के प्रभारी  दया सागर और कुछ अन्य कार्यकरता भी मोजूद थे ! दुर्ग जिले में उनकी दो विशाल जनसभाएं आयोजित की गयी थी ! पहली जन सभा 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक थी राजीव भाई ने  विशाल जनसभा को  समभोदित किया इसके बाद का कार्यक्रम दुर्ग में आयोजित था !इसके लिए वे 2 बजे बेमेतरा तहशील से रवाना हुए !      ( इसके बाद की घटना विश्वाश करने योग्य नही उसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ़ के प्रभारी और कुछ अन्य साथियों द्वारा बताई गयी है ! )

उन लोगों का कहना था कि गाड़ी में बैठते ही भाई राजीव दीक्षित जी का शरीर पसीने से तर होगया था !जब उन्होंने राजीव जी से पूछा की क्या हुआ है तो वे कहते हैं कि उनको थोड़ी गैस सिने में चढ़ गयी है शोचालय जाऊंगा तो ठीक होजाऊंगा !इसके बाद दयासागर उनको दुर्ग के अपने आश्रम में ले गये वहाँ राजीव जी शोचालय गये और कुछ देर तक बाहर नही आए , तो दयासागर जी ने उनको आवाज लगाई कि राजीव भाई सब ठीक है ना तब वो दबी सी आवाज में बोले कि आप गाड़ी स्टार्ट करो में आ रहा हूँ ! उनका कहना था की जब काफी देर तक राजीव भाई बाहर नही आए तो शोचालय का दरवाजा खोला और वहाँ भाई राजीव दीक्षित जी पसीने में लथपथ पड़े थे ! उनको बिस्तर पर लेटाया गया दयासागर जी ने उनको हस्पताल चलने को कहा राजीव भाई ने ये कहतें हुए मनाकर दिया कि होमोपेथिक डोक्टर को दिखाएँगे ! कुछ देर बाद होमोपेथिक डोक्टर वहाँ आये और राजीव भाई को दवाई दी ! इसके बाद भी राजीव भाई की हालत में  कोई सुधार नही आया तो उनको भिलाई के सेक्टर 9 के इस्पात स्वयं अस्पताल में भर्ती कराया गया ,इस अस्पताल में पूरी सविधाएं न होने के करण राजीव भाई को चवससव ठैट में भर्ती कराया गया ! भाई राजीव दीक्षित जी एैलोपैथी ट्रीटमेंट लेने से मना कर रहे थे उनका संकल्प इतना मजबूत था कि उन्होंने होस्पिटल में भर्ती होने से मनाकर दिया था ! वे कह रहे थे की उन्होंने कभी भी एलोपेथी ट्रीटमेंट नही लिया तो अब केसे लूँ !ऐसा कहा जाता ह कि बाबा राम देव ने उनको फोन किया और आईसीयू में भर्ती होने को कहा !  ऐसा कहा भी  जाता है कि फिर राजीव भाई को 5 डोक्टरों की टीम के निरक्षण में आइसियु में भर्ती करवाया गया ! उनकी अवस्था और गंभीर होती गयी और डॉक्टरों ने उनको रात 2 बजे मृत घोषित कर दिया !

( बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की बताई ये सारी घटना राज्य प्रभारी और अन्याधिकारियों द्वारा बताई गयी है!  और ये सब कितना सच या झूठ ह ये तो उनके नार्को टेस्ट करने से ही पता चल पाएगा ) क्योंकि राजीव जी की म्रत्यु का करण दिल का दौरा बताकर प्रचार किया गया था ! ३० नवम्बर को उनके मर्त शरीर को पतांजली लाया गया जहाँ लाखों समर्थक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे !और १ दिसम्बर को भाई राजीव दीक्षित जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार में किया गया !

भाई राजीव दीक्षित जी के साथियों का कहना है कि अंतिम समय में राजीव जी का चहरा पूरा कला और नीला पड़ गया था ! उनके चाहनेवालों का कहना था कि उन्हों ने पोस्टमाटर्म के लिए आग्रह किया लेकिन राजीव भाई का पोस्टमाटर्म नही होने दिया गया ! राजीव भाई की मोत भी देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की तरह हुई ! आप सबको ध्यान होगा की केसे ताशक्न्द से उनकी मर्त शरीर को लाया गया था तो शास्त्री जी के चहरे का रंग भी काला और नीला पड़ा हुआ था ! और अन्य लोगों की तरह राजीव भाई भी मानते थे की प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को जहर दिया गया था ! राजीव भाई और लाल बहादुर शास्त्री की म्रत्यु में एक और समानता थी कि उनका भी पोस्टमाटर्म नही होने दिया गया था !

राजीव भाई की म्रत्यु से जुड़े कुछ सवाल ?किसके आदेश पर यह समाचार प्रसारित किया गया कि राजीव जी की मोत दिल का दोरा पड़ने से हुई ! 29 नवम्बर दोपहर को बेमेतरा से निकलने के बाद जब उनको गेस की समस्या हुई उस टाइम दोपहर के 2 बजे से लेकर रात में उनकी म्रत्यु के टाइम तक गेस की छोटी सी समस्या का समाधान नही हो पाया !

आखिर पोस्टमाटर्म क्यों नही होने दिया गया इससे किसको को तकलीफ थी ?

राजीव भाई का फोन जो हमेशा ही ओन रहता था तो वो बन्द कैसे हो गया ?

भाई राजीव दीक्षित जी अपने साथ हमेशा एक झोला रखते थे जिस में आयुर्वेदिक और होमोपेथिक काफी सारी जरूरत की दवाएं होती थी वो खाली क्यों मिला ?

30 नवम्बर को जब उनका मृत शरीर पतंजली में रखा गया तो उनके नाक और मुहँ से क्या टपक रहा था ? और उनके सर को और माथे को काले पोलोथिन से क्यों ढका गया था ?

जब भाई राजीव दीक्षित जी की अंतिम वीडियो को आस्था चेनल पर प्र्शारित किया गया तो उस वीडियो को एडिट करके चहरे को सफेद करके दिखने की क्या जरूरत थी और यह किसके कहने पर किया गया ?

अत: पोस्टमाटर्म न होने के करण भाई राजीव दीक्षित जी की म्रत्यु आज तक भी एक रहस्य है ! भाई राजीव दीक्षित जी के समर्थक उनके म्रत्यु के बाद बाबा रामदेव से खफा हैं क्योंकि बाबा का कहना है कि राजीव भाई को शुगर व् हार्ट ब्लोकेज और बी.पी  जेसी बीमारी थी ! बाबा रामदेव ने अपने एक व्याखान में कहा की राजीव जी पतंजली में बनी शुगर की दवाई मधुनाशनी भी खाते थे  ! इसके विपरीत राजीव भाई अपने व्याखानो में यह बताते थे कि उनका शुगर बी.पी और कोलेस्ट्रोल आदि सब कुछ नोर्मल था और तो और उनका कहना था कि वे पिछले 20 साल से बीमार नही हुए और ना ही और 15 साल तक होने की कोई सम्भावना है !राजीव भाई के समर्थकों का यह कहना है कि हम राजीव भाई की म्रत्यु पर कोई प्रश्न नही उठाते लेकिन हमे यह समझ में नही आता कि राजीव भाई की म्रत्यु के बाद पतंजली योगपीठ वालों ने राजीव भाई का तिरस्कार करना क्यों शुरू कर दिया ? मंचों के पीछे उनकी फिटो क्यों नही लगाई जाती और आस्था चेनल ने उनके व्याख्यानों को दिखाना क्यों बन्द कर दिया ? और कभी कभार उनकी पूण्यतिथि पर उनके व्यख्यान दिखाए भी जाते हैं तो कट पिट कर और 4-4- घंटों के व्याखानों को कट कर  सिर्फ एकाध घंटे का ही दिखाया जाता है !

इसके अतिरिक्त राजीव भाई ने जिस उदेश्य से भारत स्वाभिमान आन्दोलन की स्थापना की थी बाबा रामदेव उस राह से हट क्यों गये ? भाई राजीव दीक्षित जी और बाबा ये कहते थे की सब राजनीतिक पार्टियाँ एक जेसी हैं और वे कहते थी की २०१४ में हम अच्छे लोगों को साथ लेकर एक अच्छा राजनीतिक विकल्प तेयार करेंगे लेकिन राजीव भाई की म्रत्यु के बाद बाबा ने आन्दोलन की दिशा बदलदी और राजीव जी की सोच के विरुद्ध वे भाजपा  का समर्थन कर रहे हैं! इसलिए बहुत से राजीव भाई के समर्थक इस आन्दोलन से हटकर अपने अपने वेवल पर भाई राजीव दीक्षित जी का प्रचार करने में लगे हैं !

भाई राजीव दीक्षित जी  पुरे जीवन भर देश में घूम घूम कर लग-भग 5000 व्याख्यान दिये  ! सन 2005 तक वे पुरे भारत का चार बार भ्रमण कर चुके थे ! उन्होंने बहुत सी विदेशी कम्पनियों के नाक में दम कर रखा था ! भारत के किसी भी मिडिया चेनल ने उनको दिखने का दम नही था क्योंकि राजीव भाई ऐसे वक्ता थे कि एक बार उनको कोई सुन लेता था तो बढ़ी से बढ़ी क्रांति के लिए तयार हो जाता ! उनकी वाणी में माँ सरस्वती निवास करती थी और जब वो एक बार बोलना शुरू करते थे तो लोग मन्त्र मुग्ध होकर घंटों उनको सुना करते थे !

३०  नवम्बर १९६७ को जन्मे और ३० नवम्बर २०१० को ही संसार को छोड़ने वाले अथाह ज्ञान भंडार भाई राजीव दीक्षित जी आज केवल आवाज और वीडियो में हमारे बीच विद्यमान है और ये आवाज आज भी लोगों का मार्ग दर्शन कर रही है और”भारत को फिर से भारत की मान्यता के आधार पर खड़ा करने” की  की उमीद बने हुए हैं !

राजीव भाई को कोटि कोटि नमन !

अंत में उनको एक भाव पूर्ण पूर्ण श्रद्धांजलि :-

शत् – शत् नमन है

जिसने भारत का सोया स्वाभिमान जगा दिय

भारत सोने की चिडिया था -.है.और आगे कैसे होगा

हम-सब को फिर से बता दिया ,

आज जब सत्य बोलना नामुमकिन हो,

उसने उस डगर पे चलना हमे सिखा दिया

भारत का सोया स्वाभिमान जगा दिया.

वो आया था “विवेकान्द” बन कर

अपने सत् कर्मो से बता दिया

पर अफसोस कि देश आज भरा गदारो से,

जिस कारण “माँ भारतीय के लाल को ,

“शास्त्री जी” की तरह विदा किया !

 

 

 

 

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