झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की म्रत्यु कैसे हुई ? किसने करवाई क्या आपको पता है ?

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई , jgaansi ki rani luxmi bai
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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की म्रत्यु कैसे हुई ? किसने करवाई क्या आपको पता है ?

दोस्तों झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को कौन नही जानता ! उन जैसी वीरांगना विरला ही पैदा होती हैं ! उनकी वीरता और चतुराई अंग्रेजो पर हमेशा भरी पडती थी, लेकिन कहते हैं कि जब घर में ही दुश्मन हो तो बाहर जाने की जरूरत क्या है ? और अपने यहाँ तो एक कहावत भी है कि “घर का भेदी लंका ढाये” ! इसी तरह इस देश में भी बहुत से परिवार गद्दार थे, वे अंग्रेजों के चापलूस थे ! एैसे ही परिवार अंग्रेजों के लिए काम करते थे ! और उनमे से एक परिवार अब भी भारत में है, जिसने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की हत्या करवाने में अंग्रेजों की सहयता की !

आगे राजीव दीक्षित जी कहते हैं, कि हमारे देश को गुलाम करने के लिए अंग्रेजों ने कोई लड़ाई नही लडी ! बल्कि उन्होंने सिर्फ कुछ सन्धियाँ करी ! इन संधियों में कहा क्या जाता था ? जब हम इन को पढ़ते हैं, तो ये  एक क्रूर मजाक भारत के राजाओं के साथ किया जाता था ! और वो लिखा जाता था की दोस्ती या मित्रता के लिए संधि लेकिन उन सन्धियों में, जो अन्दर लिखा जाता था वो इस संधि के बिलकुल उल्टा होता था ! और उसमे सारी शत्रुता की बातें होती थी !

नाम तो होता था मित्रता की संधि लेकिन अन्दर क्या था ? वो एक उदाहरण से समझें ! अंग्रेजों ने भारत के एक राजा के साथ संधि करी जिसका नाम था गंगाधर राव ! ये श्री गंगाधर राव झाँसी के राजा हुआ करते थे ! और झाँसी उस समय एक राज्य हुआ करता था ! अब यह सिर्फ एक जिला है ! आज जितने भी जिले है, ये सारे उस समय में एक राज के मुकाबले के हुआ करते थे ! अब हुआ क्या ? अंग्रेजों ने झाँसी के राजा गंगाधर राव को संधि भेजी कि अंग्रेज सरकार और गंगाधर राव में मित्रता रहेगी !

लेकिन उस संधि ले अन्त में लिखा गया कि यदि गंगाधर राव की कोई अपनी सन्तान नही होगी, तो उसका राज्य अंग्रेजी सरकार ले लेगी ! और संयोग भी कुछ एैसा ही हुआ कि उनकी अपनी कोई सन्तान नही हुई ! और उन्ही गंगाधर राव की पत्नी थी झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ! तो इस पर दोनों पति और पत्नी ने मिलकर एक फैसला कर लिया कि हम किसी को दत्तक पुत्र ले लेंगे ! उन्होंने एक पुत्र गोद ले लिया और यह परम्परा भारत में हजारों सालों से चली आ रही है !

परन्तु अंग्रेजों को यह परम्परा समझ नही आती थी, क्योंकि उनके यहाँ एैसा व्यधान ही नही था ! तो इस लिए अंग्रेजों ने इसको माना नही कि कोई गोद लिया पुत्र उनका उराधिकारी हो सकता ! क्योंकि अंग्रेजो का कहना था कि हमारे देश में एैसा कोई सिस्टम नही तो यहाँ यह कैसे हो सकता है ? और यहीं से झगड़ा शुरू हुआ ! अंग्रेजों ने जबरदस्ती झाँसी राज्य को अपने राज्य मिलाने की कौशिस की, तो इस पर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई में ऐलान किया कि “मेरी झाँसी मै नही दूँगी” ! और यही वो वाक्य था जो भारत वासियों के खून में गर्मी पैदा करता था ! इस तरह की सन्धियाँ करके अंग्रेजों ने भारत के बहुत से राज्य हथ्या लिए थे !

लैड एक्विजेशन्न एक्ट क्या है ?

1894 में अंग्रेजों ने लैड एक्विजेशन्न एक्ट बनाया ! यही वह कानून था जिसके आधार पर अंग्रेजों ने पुरे भारत पर कब्जा कर लिया था ! यानि यह कानून था जमीन को हडपने का कानून और इस काम में डल्होजी नामक बहुत ही कुख्यात अंग्रेज था ! वह जहाँ भी जाता था वहाँ की सारी जमीने हडप लेता था ! और झाँसी का राज्य भी इसी अंग्रेज अधिकारी में हडपा था !

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 झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को मरने में अंग्रेजों का साथ किसने दिया :-

क्योंकि अग्रेजों ने राज्य हडप लिया था, तो इस लिए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा ताकि वे अपने राज्य को बचा सके  ! लेकिन क्या आप जानते है ? झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को मरवाने में किसका हाथ था ?  जी हाँ यह वही खान्दिया, सिंधिया खानदान जिन्होंने एक हीरे की अंगूठी के लिए यह गिनोना काम किया ! और ये वही सिंधिया खानदान है, जिसके सपूत ज्योतिरादित्य माद्वराव सिंधिया हीरे की अंगूठी लेकर आज भी इस देश में मंत्री बने बैठे हैं ! एैसे गंदे लोग आज भी हमारे देश पर राज करते हैं ! जिन्होंने अंग्रेजो की मदद से देश को बर्बाद करने में कसर नही छोड़ी !

वह अकेला मंत्री नही है, बल्कि उसके सारे परिवार वाले राजनीति में हैं ! कोई किसी पार्टी में तो कोई किसी पार्टी में क्योंकि ऐशोआराम और अयासी उनके खून में है ! और ये यहाँ से हटने का नाम नही ले रहे क्योंकि इस देश में एैसा ही चलता है ! लोगों को अपने आप से फुर्सत नही मिलती तो देश का कहाँ से सोचेंगे !

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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की म्रत्यु के बारे में अधिक जानकारी के लिए राजीव दीक्षित जी का यह वीडियो देखें >>

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